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mahabharat 14.18.15-18: दान, उपवास, ब्रह्मचर्य, शास्त्रविहित वेदों का अध्ययन, इन्द्रियों का संयम, शांति, सभी जीवों पर दया, मन का संयम, मृदुता, दूसरों से धन लेने की इच्छा का त्याग, मन की इच्छा से भी संसार के जीवों को कष्ट न पहुँचाना, माता-पिता की सेवा, देवताओं, अतिथियों और गुरुजनों की पूजा, दया, पवित्रता, इन्द्रियों को सदैव वश में रखना और सत्कर्मों का प्रचार करना - ये सब महापुरुषों का आचरण कहा जाता है। उनके आचरण से धर्म की प्राप्ति होती है, जो सदैव लोगों की रक्षा करता है। 15-18   |   mahabharat अध्याय 14.18: जीवके गर्भ-प्रवेश,आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.18.15-18 
दानं व्रतं ब्रह्मचर्यं यथोक्तं ब्रह्मधारणम्।
दम: प्रशान्तता चैव भूतानां चानुकम्पनम्॥ १५॥
संयमाश्चानृशंस्यं च परस्वादानवर्जनम्
व्यलीकानामकरणं भूतानां मनसा भुवि॥ १६॥
मातापित्रोश्च शुश्रूषा देवतातिथिपूजनम्।
गुरुपूजा घृणा शौचं नित्यमिन्द्रियसंयम:॥ १७॥
प्रवर्तनं शुभानां च तत् सतां वृत्तमुच्यते।
ततो धर्म: प्रभवति य: प्रजा: पाति शाश्वती:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
दान, उपवास, ब्रह्मचर्य, शास्त्रविहित वेदों का अध्ययन, इन्द्रियों का संयम, शांति, सभी जीवों पर दया, मन का संयम, मृदुता, दूसरों से धन लेने की इच्छा का त्याग, मन की इच्छा से भी संसार के जीवों को कष्ट न पहुँचाना, माता-पिता की सेवा, देवताओं, अतिथियों और गुरुजनों की पूजा, दया, पवित्रता, इन्द्रियों को सदैव वश में रखना और सत्कर्मों का प्रचार करना - ये सब महापुरुषों का आचरण कहा जाता है। उनके आचरण से धर्म की प्राप्ति होती है, जो सदैव लोगों की रक्षा करता है। 15-18
 
Charity, fasting, celibacy, study of the Vedas as prescribed in the scriptures, abstinence from the senses, peace, kindness to all living beings, restraint of mind, softness, renunciation of the desire to take money from others, not harming the living beings of the world even with the will of mind, service to parents, worship of deities, guests and gurus, kindness, purity, always keeping the senses under control and propagating good deeds - all this is called the behavior of great men. Their rituals lead to religion, which always protects the people. 15-18
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)