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mahabharat 14.18.10: जैसे अग्नि लोहे के ढेले में प्रवेश करके उसे बहुत गर्म कर देती है, वैसे ही जीव गर्भ में प्रवेश करके उसमें चेतना उत्पन्न करता है। इसे तुम अच्छी तरह समझ लो॥10॥   |   mahabharat अध्याय 14.18: जीवके गर्भ-प्रवेश,आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.18.10 
लोहपिण्डं यथा वह्नि: प्रविश्य ह्यतितापयेत्।
तथा त्वमपि जानीहि गर्भे जीवोपपादनम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जैसे अग्नि लोहे के ढेले में प्रवेश करके उसे बहुत गर्म कर देती है, वैसे ही जीव गर्भ में प्रवेश करके उसमें चेतना उत्पन्न करता है। इसे तुम अच्छी तरह समझ लो॥10॥
 
Just as fire enters a lump of iron and makes it very hot, similarly a living being enters the womb and brings consciousness to it. You must understand this very well.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)