Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.18.1: सिद्ध ब्राह्मण बोले- कश्यप ! इस संसार में किए गए अच्छे-बुरे कर्म बिना फल भोगे समाप्त नहीं होते। वे कर्म मनुष्य को कर्मानुसार एक के बाद दूसरा शरीर धारण कराकर अपना फल देते रहते हैं।॥1॥ | mahabharat अध्याय 14.18: जीवके गर्भ-प्रवेश,आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मण उवाच
शुभानामशुभानां च नेह नाशोऽस्ति कर्मणाम्।
प्राप्य प्राप्यानुपच्यन्ते क्षेत्रं क्षेत्रं तथा तथा॥ १॥
अनुवाद
सिद्ध ब्राह्मण बोले- कश्यप ! इस संसार में किए गए अच्छे-बुरे कर्म बिना फल भोगे समाप्त नहीं होते। वे कर्म मनुष्य को कर्मानुसार एक के बाद दूसरा शरीर धारण कराकर अपना फल देते रहते हैं।॥1॥
Siddha Brahmin said- Kashyap! The good and bad deeds done in this world do not end without facing their consequences. Those deeds keep giving their results by making the person take one body after another according to the deeds.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥