श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 17: काश्यपके प्रश्नोंके उत्तरमें सिद्ध महात्माद्वारा जीवकी विविध गतियोंका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  14.17.9 
यदायमतिकष्टानि सर्वाण्युपनिषेवते।
अत्यर्थमपि वा भुङ्‍क्ते न वा भुङ्‍क्ते कदाचन॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वह सब अत्यन्त हानि पहुँचाने वाली वस्तुओं का सेवन करता है। कभी वह बहुत अधिक खाता है, कभी बिल्कुल नहीं खाता।॥9॥
 
He consumes all the things that cause extreme harm. Sometimes he eats too much, sometimes he does not eat at all.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)