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mahabharat 14.17.21-22: अन्य प्रकार की प्रचण्ड वायु से प्रेरित होकर तथा शरीर में शीत से कुपित होकर जो वायु पाँचों भूतों में प्राण और अपान के स्थान में स्थित रहती है, वह पाँचों भूतों के प्रभाव को नष्ट कर देती है और देहधारियों को बड़ी पीड़ा के साथ त्यागकर ऊपर के लोक में चली जाती है ॥21-22॥   |   mahabharat अध्याय 14.17: काश्यपके प्रश्नोंके उत्तरमें सिद्ध महात्माद्वारा जीवकी विविध गतियोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 17: काश्यपके प्रश्नोंके उत्तरमें सिद्ध महात्माद्वारा जीवकी विविध गतियोंका वर्णन  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  14.17.21-22 
यथा पञ्चसु भूतेषु सम्भूतत्वं नियच्छति।
शैत्यात् प्रकुपित: काये तीव्रवायुसमीरित:॥ २१॥
य: स पञ्चसु भूतेषु प्राणापाने व्यवस्थित:।
स गच्छत्यूर्ध्वगो वायु: कृच्छ्रान्मुक्त्वा शरीरिण:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
अन्य प्रकार की प्रचण्ड वायु से प्रेरित होकर तथा शरीर में शीत से कुपित होकर जो वायु पाँचों भूतों में प्राण और अपान के स्थान में स्थित रहती है, वह पाँचों भूतों के प्रभाव को नष्ट कर देती है और देहधारियों को बड़ी पीड़ा के साथ त्यागकर ऊपर के लोक में चली जाती है ॥21-22॥
 
Inspired by other types of strong wind and angry with the cold in the body, the wind which is present in the place of prana and apana in the five ghosts, destroys the impact of the five ghosts and after leaving the bodily beings with great pain, it goes to the upper world. 21-22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)