श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 16: अर्जुनका श्रीकृष्णसे गीताका विषय पूछना और श्रीकृष्णका अर्जुनसे सिद्ध, महर्षि एवं काश्यपका संवाद सुनाना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  14.16.46 
बहु मन्ये च ते बुद्धिं भृशं सम्पूजयामि च।
येनाहं भवता बुद्धो मेधावी ह्यसि काश्यप॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
कश्यप! मैं आपकी बुद्धिमत्ता की सराहना करता हूँ और उसका बहुत सम्मान करता हूँ। आपने मुझे पहचान लिया है, इसलिए मैं कहता हूँ कि आप बहुत बुद्धिमान हैं।
 
Kashyap! I appreciate your intelligence and give it a lot of respect. You have recognised me, that is why I say that you are very intelligent. 46.
 
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि षोडशोऽध्याय:॥ १६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें सोलहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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