Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.16.19-21: प्राचीन काल में कश्यप नाम का एक धर्मज्ञ और तपस्वी ब्राह्मण एक महान ऋषि के पास गया, जो धर्म-सम्बन्धी शास्त्रों के समस्त रहस्यों को जानने वाला, भूत और भविष्य के ज्ञान में निपुण, संसार के ज्ञान में कुशल, सुख-दुःख के रहस्यों को समझने वाला, जन्म-मरण के तत्त्व को जानने वाला, पाप-पुण्य को जानने वाला तथा कर्मानुसार उच्च-नीच प्राणियों के भाग्य को प्रत्यक्ष देखने वाला था।॥19-21॥ | mahabharat अध्याय 14.16: अर्जुनका श्रीकृष्णसे गीताका विषय पूछना और श्रीकृष्णका अर्जुनसे सिद्ध, महर्षि एवं काश्यपका संवाद सुनाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्राचीन काल में कश्यप नाम का एक धर्मज्ञ और तपस्वी ब्राह्मण एक महान ऋषि के पास गया, जो धर्म-सम्बन्धी शास्त्रों के समस्त रहस्यों को जानने वाला, भूत और भविष्य के ज्ञान में निपुण, संसार के ज्ञान में कुशल, सुख-दुःख के रहस्यों को समझने वाला, जन्म-मरण के तत्त्व को जानने वाला, पाप-पुण्य को जानने वाला तथा कर्मानुसार उच्च-नीच प्राणियों के भाग्य को प्रत्यक्ष देखने वाला था।॥19-21॥
In ancient times, a religious scholar and ascetic Brahmin by the name of Kashyap went to a great sage who knew all the secrets of the scriptures related to religion, was proficient in the knowledge of the past and the future, skilled in the knowledge of the world, understood the secrets of happiness and sorrow, knew the principles of birth and death, knew the sins and virtues and was a direct observer of the fate of high and low beings according to their karma.॥19-21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥