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mahabharat 14.15.23: यद्यपि पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर हमारे शासक और गुरु हैं, फिर भी हमने अपनी शिक्षाएँ दी हैं और उस महात्मा ने हमारी सभी शिक्षाओं को भली-भाँति ग्रहण किया है।   |   mahabharat अध्याय 14.15: भगवान‍् श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 15: भगवान‍् श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  14.15.23 
शिष्टो युधिष्ठिरोऽस्माभि: शास्ता सन्नपि पाण्डव:।
तेन तत् तु वच: सम्यग् गृहीतं सुमहात्मना॥ २३॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर हमारे शासक और गुरु हैं, फिर भी हमने अपनी शिक्षाएँ दी हैं और उस महात्मा ने हमारी सभी शिक्षाओं को भली-भाँति ग्रहण किया है।
 
Although Yudhishthira, son of Pandu, is our ruler and teacher, we have still given our teachings, and that great soul has accepted all our teachings very well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)