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mahabharat 14.15.2: वैशम्पायनजी बोले - प्रजानाथ! नरेश्वर! जब पाण्डवों ने राष्ट्र पर विजय प्राप्त कर ली और सर्वत्र शान्ति स्थापित हो गई, तब भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन बहुत प्रसन्न हुए॥2॥   |   mahabharat अध्याय 14.15: भगवान‍् श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 15: भगवान‍् श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  14.15.2 
वैशम्पायन उवाच
विजिते पाण्डवै राजन् प्रशान्ते च विशाम्पते।
राष्ट्रे बभूवतुर्हृष्टौ वासुदेवधनंजयौ॥ २॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी बोले - प्रजानाथ! नरेश्वर! जब पाण्डवों ने राष्ट्र पर विजय प्राप्त कर ली और सर्वत्र शान्ति स्थापित हो गई, तब भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन बहुत प्रसन्न हुए॥2॥
 
Vaishampayanji said – Prajanath! Nareshwar! When the Pandavas conquered the nation and peace was established everywhere, Lord Krishna and Arjun became very happy. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)