Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.12.8: या पार्थ! तुम्हारा स्वभाव ही तुम्हें आकर्षित करता है। पांडवों के सामने एकवस्त्रधारी कृष्ण को घसीटकर दरबार में लाया गया। उसे उस अवस्था में देखकर भी अब तुम उसे याद नहीं करना चाहते। 8. | mahabharat अध्याय 14.12: भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको मनपर विजय करनेके लिये आदेश । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथवा ते स्वभावोऽयं येन पार्थावकृष्यसे।
दृष्ट्वा सभागतां कृष्णामेकवस्त्रां रजस्वलाम्।
मिषतां पाण्डवेयानां न तस्य स्मर्तुमिच्छसि॥ ८॥
अनुवाद
या पार्थ! तुम्हारा स्वभाव ही तुम्हें आकर्षित करता है। पांडवों के सामने एकवस्त्रधारी कृष्ण को घसीटकर दरबार में लाया गया। उसे उस अवस्था में देखकर भी अब तुम उसे याद नहीं करना चाहते। 8.
Or Parth! It is your nature which attracts you. In front of the Pandavas, a single-clothed Krishna was dragged into the court. Even after seeing her in that state, you do not want to remember her now. 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥