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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 12: भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको मनपर विजय करनेके लिये आदेश
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श्लोक 4
श्लोक
14.12.4
उष्णेन बाध्यते शीतं शीतेनोष्णं च बाध्यते।
सत्त्वं रजस्तमश्चेति त्रय आत्मगुणा: स्मृता:॥ ४॥
अनुवाद
गरमी सर्दी को दूर करती है और सर्दी गर्मी को दूर करती है। सत्व, रज और तम - ये तीन अन्तःकरण के गुण माने गए हैं ॥4॥
Hot relieves cold and cold relieves heat. Sattva, Raja and Tama – these three are considered to be the qualities of the inner conscience. ॥4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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