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श्लोक 14.12.16  |
एतां बुद्धिं विनिश्चित्य भूतानामागतिं गतिम्।
पितृपैतामहे वृत्ते शाधि राज्यं यथोचितम्॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार समस्त प्राणी आते-जाते रहते हैं। अपनी बुद्धि से ऐसा निश्चय करके तुम अपने पूर्वजों के आचरण का अनुसरण करो और उचित रीति से राज्य करो॥16॥ |
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| All beings keep coming and going in this manner. Having made this decision with your intellect, you should follow the behaviour of your forefathers and rule the kingdom in a proper manner.॥ 16॥ |
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इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अश्वमेधपर्वणि कृष्णधर्मसंवादे द्वादशोऽध्याय:॥ १२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अश्वमेधपर्वमें श्रीकृष्ण और युधिष्ठिरका संवादविषयक बारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२॥
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