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श्लोक 14.113.d50  |
तथैव भीमसेनोऽपि रथमारुह्य वीर्यवान्।
छत्रं शतशलाकं च दिव्यमाल्योपशोभितम्॥ |
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| अनुवाद |
| इसी प्रकार महाबली भीमसेन भी रथ पर चढ़कर भगवान के ऊपर छत्र धारण किये खड़े हो गये। वह छत्र सौ धनुषों वाला और दिव्य मालाओं से सुशोभित था। |
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| Similarly, the mighty Bhimasena also climbed on the chariot and stood holding an umbrella over the Lord. That umbrella had a hundred bows and was adorned with divine garlands. |
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