श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 113: भगवान‍् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  14.113.d3 
त्रीणि षष्टिशतान्याहुरस्थीन्यस्य युधिष्ठिर।
तेषां विकल्पना कार्या यथाशास्त्रं विनिश्चितम्॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! मनुष्य शरीर में तीन सौ साठ अस्थियाँ कही गयी हैं। उन सबकी शास्त्रविधि से कल्पना करके उस मूर्ति को जला देना चाहिए।
 
Yudhisthira! There are said to be three hundred and sixty bones in the human body. That image should be burnt after imagining all of them in the manner prescribed by the scriptures.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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