vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 113: भगवान् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन
»
श्लोक d23
श्लोक
14.113.d23
बहुवर्षसहस्राणि तपस्तपति यो नर:।
नासौ पदमवाप्नोति मद्भक्तैर्यदवाप्यते॥
अनुवाद
हजारों वर्षों तक तपस्या करने वाला व्यक्ति भी उस पद को प्राप्त नहीं कर सकता, जो मेरे भक्तों को आसानी से प्राप्त हो जाता है।
Even a person who performs penance for thousands of years cannot attain that position which is easily attained by my devotees.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×