Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.113.d11: अतः शूद्र को मेरा नाम भी प्रणव से उच्चारण नहीं करना चाहिए, क्योंकि वेद विद्वान प्रणव को ही इस संसार में सर्वश्रेष्ठ वेद मानते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.113: भगवान‍् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 113: भगवान‍् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  14.113.d11 
तस्मात् सप्रणवं शूद्रो मन्नामापि न कीर्तयेत्।
प्रणवं हि परं लोके ब्रह्म ब्रह्मविदो विदु:॥
 
 
अनुवाद
अतः शूद्र को मेरा नाम भी प्रणव से उच्चारण नहीं करना चाहिए, क्योंकि वेद विद्वान प्रणव को ही इस संसार में सर्वश्रेष्ठ वेद मानते हैं।
 
Therefore, Shudra should not even pronounce my name with Pranava, because Veda scholars consider Pranava to be the best Veda in this world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)