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mahabharat 14.113.d10: हे राजन! मैं देवताओं, दानवों और राक्षसों से नहीं डरता। किन्तु शूद्र के मुख से वेदपाठ सुनकर मुझे सदैव भय लगता है।   |   mahabharat अध्याय 14.113: भगवान‍् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 113: भगवान‍् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन  »  श्लोक d10
 
 
श्लोक  14.113.d10 
न भयं देवदैत्येभ्यो रक्षोभ्यश्चैव मे नृप।
शूद्रवक्त्राच्च्युतं ब्रह्म भयं तु मम सर्वदा॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैं देवताओं, दानवों और राक्षसों से नहीं डरता। किन्तु शूद्र के मुख से वेदपाठ सुनकर मुझे सदैव भय लगता है।
 
O King! I am not afraid of gods, demons and monsters. But the recitation of Vedas from the mouth of a Shudra always frightens me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)