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श्लोक  14.112.d29 
युधिष्ठिर उवाच
कीदृशानां तु शूद्राणां नानुगृह्णासि चार्चनम्।
उद्वेगस्तव कस्माद्धि तन्मे ब्रूहि सुरेश्वर॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "हे देवेश्वर! शूद्रों की किस प्रकार की पूजा आपको स्वीकार नहीं है और कौन-सा कार्य आपको नापसंद है? कृपया मुझे यह बताइए।"
 
Yudhishthira asked, "O Deveshwar! What kind of worship of Shudras do you not accept and what act do you dislike? Please tell me this."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)