Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.111.d7-d9: राजेन्द्र! देवता, वसु, रुद्र, पितर, अश्विनीकुमार, साध्यगण, विश्वेदेव, गन्धर्व, सिद्ध, ब्रह्मर्षि, सोम, ग्रह, नदियाँ, समुद्र, मरुत्, अप्सराएँ, नाग, यक्ष, राक्षस और गुह्यक- ये तथा अन्य देवता भी इन्द्रियों का संयम करके विषुवकाल में व्रत करते हैं और बड़े यत्न से परमात्मा के ध्यान में लगे रहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त  »  श्लोक d7-d9
 
 
श्लोक  14.111.d7-d9 
देवाश्च वसवो रुद्रा: पितरश्चाश्विनौ तथा।
साध्याश्च विश्वे गन्धर्वा: सिद्धा ब्रह्मर्षयस्तथा॥
सोमादयो ग्रहाश्चैव सरित: सागरास्तथा।
मरुतोऽप्सरसो नागा यक्षराक्षसगुह्यका:॥
एते चान्ये च राजेन्द्र विषुवे संयतेन्द्रिया:।
सोपवासा: प्रयत्नेन भवन्ति ध्यानतत्परा:॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! देवता, वसु, रुद्र, पितर, अश्विनीकुमार, साध्यगण, विश्वेदेव, गन्धर्व, सिद्ध, ब्रह्मर्षि, सोम, ग्रह, नदियाँ, समुद्र, मरुत्, अप्सराएँ, नाग, यक्ष, राक्षस और गुह्यक- ये तथा अन्य देवता भी इन्द्रियों का संयम करके विषुवकाल में व्रत करते हैं और बड़े यत्न से परमात्मा के ध्यान में लगे रहते हैं।
 
Rajendra! The gods, the Vasus, the Rudras, the ancestors, the Ashwini Kumars, the Sadhyagans, the Vishvedevs, the Gandharvas, the Siddhas, the Brahmarishis, Soma, the planets, the rivers, the oceans, the Maruts, the Apsaras, the Nagas, the Yakshas, ​​the Rakshasas and the Guhyakas – these and other gods also fast during the equinox with restraint in their senses and engage in the meditation of the Supreme Soul with great effort.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)