Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.111.d38: क्षमा ही दया है और क्षमा ही त्याग है। क्षमा से ही सारा जगत धारण करता है, इसलिए क्षमाशील ब्राह्मण को देवता कहा गया है, वह सबमें श्रेष्ठ है। | mahabharat अध्याय 14.111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्षमा ही दया है और क्षमा ही त्याग है। क्षमा से ही सारा जगत धारण करता है, इसलिए क्षमाशील ब्राह्मण को देवता कहा गया है, वह सबमें श्रेष्ठ है।
Forgiveness is mercy and forgiveness is sacrifice. The whole world is sustained by forgiveness; hence the Brahmin who is forgiving is called a god, he is the best of all.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥