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mahabharat 14.111.d35: पाण्डुनन्दन! क्षमा सभी तीर्थों में श्रेष्ठ तीर्थ है। क्षमा करने वाले को इस लोक में भी सुख मिलता है और परलोक में भी।   |   mahabharat अध्याय 14.111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त  »  श्लोक d35
 
 
श्लोक  14.111.d35 
क्षमा तु परमं तीर्थं सर्वतीर्थेषु पाण्डव।
क्षमावतामयं लोक: परश्चैव क्षमावताम्॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! क्षमा सभी तीर्थों में श्रेष्ठ तीर्थ है। क्षमा करने वाले को इस लोक में भी सुख मिलता है और परलोक में भी।
 
Pandunandan! Forgiveness is the greatest pilgrimage among all the pilgrimages. Forgiving people find happiness in this world and the next world too.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)