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mahabharat 14.111.d28: व्रतों का पालन, सादगी, देवताओं की सेवा और गुरु की भक्ति - ये सब तीर्थ कहलाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.111.d28 
व्रतस्य पारणं तीर्थमार्जवं तीर्थमुच्यते।
देवशुश्रूषणं तीर्थं गुरुशुश्रूषणं तथा॥
 
 
अनुवाद
व्रतों का पालन, सादगी, देवताओं की सेवा और गुरु की भक्ति - ये सब तीर्थ कहलाते हैं।
 
Observance of fasts, simplicity, service to the gods and devotion to the Guru - all these are called pilgrimages.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)