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mahabharat 14.111.d19: राजेन्द्र! जब तक आकाश में चन्द्रमा सहित तारे विद्यमान रहेंगे, तब तक वह चन्द्रलोक में सम्मानपूर्वक निवास करेगा।   |   mahabharat अध्याय 14.111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त  »  श्लोक d19
 
 
श्लोक  14.111.d19 
यावदृक्षाणि तिष्ठन्ति गगने शशिना सह।
तावत् कालं स राजेन्द्र सोमलोके महीयते॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! जब तक आकाश में चन्द्रमा सहित तारे विद्यमान रहेंगे, तब तक वह चन्द्रलोक में सम्मानपूर्वक निवास करेगा।
 
Rajendra! As long as the stars exist along with the moon in the sky, he will reside with honour in the moon-lok.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)