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mahabharat 14.111.d10: अतः हे युधिष्ठिर! तुम्हें विषुव के अवसर पर अन्न, गौ, तिल, भूमि, कन्या, घर, विश्रामस्थान, अन्न, वाहन, शय्या तथा अन्य वस्तुएं, जिन्हें मैंने दान करने के लिए उपयुक्त बताया है, दान करनी चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 14.111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त  »  श्लोक d10
 
 
श्लोक  14.111.d10 
अन्नं गावस्तिलान् भूमिं कन्यादानं तथैव च।
गृहमायतनं धान्यं वाहनं शयनं तथा॥
यच्चान्यच्च मया प्रोक्तं तत् प्रयच्छ युधिष्ठिर।
 
 
अनुवाद
अतः हे युधिष्ठिर! तुम्हें विषुव के अवसर पर अन्न, गौ, तिल, भूमि, कन्या, घर, विश्रामस्थान, अन्न, वाहन, शय्या तथा अन्य वस्तुएं, जिन्हें मैंने दान करने के लिए उपयुक्त बताया है, दान करनी चाहिए।
 
Therefore, Yudhishthira, you should donate food grains, cow, sesame seeds, land, daughter, house, resting place, grain, vehicle, bed and other things that I have told you are suitable for donating, on the occasion of equinox.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)