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mahabharat 14.110.d49: एकादशी को व्रत रखना चाहिए और द्वादशी को मेरी पूजा करनी चाहिए। उस दिन श्रद्धालु मनुष्य को यथाशक्ति ब्राह्मणों का पूजन भी करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 14.110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.110.d49 
एकादश्यामुपोष्याथ द्वादश्यामर्चयेत् तु माम्।
विप्रानपि यथालाभं पूजयेद् भक्तिमान् नर:॥
 
 
अनुवाद
एकादशी को व्रत रखना चाहिए और द्वादशी को मेरी पूजा करनी चाहिए। उस दिन श्रद्धालु मनुष्य को यथाशक्ति ब्राह्मणों का पूजन भी करना चाहिए।
 
One should fast on Ekadashi and worship me on Dwadashi. On that day, a devoted person should also worship Brahmins as much as he can.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)