श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति  »  श्लोक d48
 
 
श्लोक  14.110.d48 
श्रीभगवानुवाच
शृणु राजन् यथा पूर्वं तत् सर्वं कथयामि ते।
परमं कृष्णद्वादश्यामर्चनायां फलं मम॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले- राजन! मैं पहले की तरह तुम्हारे सभी प्रश्नों का उत्तर दूँगा, सुनो। कृष्ण पक्ष की द्वादशी को मेरी पूजा करने से महान फल मिलता है।
 
Sri Bhagavan said- King! I will answer all your questions as before, listen. There is a great reward in worshipping me on the Dwadashi of the dark fortnight.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)