श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति  »  श्लोक d43
 
 
श्लोक  14.110.d43 
हयवक्त्र नमस्तेऽस्तु चक्रपाणे नमो नम:।
पञ्चभूत नमस्तेऽस्तु पञ्चायुध नमो नम:॥
 
 
अनुवाद
'हयग्रीव! आपको नमस्कार है। चक्रपाणे! आपको बारंबार नमस्कार है। पंचभूतस्वरूप! आपको नमस्कार है। आप पाँच आयुध धारण करने वाले हैं, आपको नमस्कार है।'
 
‘Hayagriva! I salute you. Chakrapane! I salute you again and again. Panchabhutaswaroop! I salute you. You are the one who carries five weapons; I salute you.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)