श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति  »  श्लोक d41
 
 
श्लोक  14.110.d41 
रुद्ररूप नमस्तेऽस्तु रुद्रकर्मरताय ते।
पञ्चयज्ञ नमस्तेऽस्तु सर्वयज्ञ नमो नम:॥
 
 
अनुवाद
हे रुद्र रूप! आपको नमस्कार है। हे रुद्र कर्म में लगे हुए आपको नमस्कार है। हे पंचयज्ञ रूप! आपको नमस्कार है। हे सर्वयज्ञ रूप! आपको नमस्कार है।
 
Rudra form! Salutations to you. Salutations to you who are engaged in Rudra Karma. Panchyagya form! Salutations to you. Sarvayagya form! Salutations to you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)