श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति  »  श्लोक d40
 
 
श्लोक  14.110.d40 
लोकप्रिय नमस्तेऽस्तु भक्तवत्सल ते नम:।
ब्रह्मावास नमस्तेऽस्तु ब्रह्मनाथ नमो नम:॥
 
 
अनुवाद
आप समस्त लोकों के प्रिय हैं। आपको नमस्कार है। हे भक्त-प्रेमी! आपको नमस्कार है। आप ब्रह्मा के धाम और उनके स्वामी हैं। आपको नमस्कार है।
 
‘You are the beloved of all the worlds. Salutations to you. O devotee-loving one! Salutations to you. You are the abode of Brahma and his master. Salutations to you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)