Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.110.d37: 'वेदत्रयी आपका स्वरूप है, आप तीनों वेदों के स्वामी हैं और तीनों वेद आपकी स्तुति करते हैं। आप यज्ञस्वरूप हैं, यज्ञ में प्रकट होते हैं और यज्ञ के स्वामी हैं। मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ।' | mahabharat अध्याय 14.110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान्की स्तुति । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'वेदत्रयी आपका स्वरूप है, आप तीनों वेदों के स्वामी हैं और तीनों वेद आपकी स्तुति करते हैं। आप यज्ञस्वरूप हैं, यज्ञ में प्रकट होते हैं और यज्ञ के स्वामी हैं। मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ।'
‘Vedatrayi is your form, you are the lord of the three Vedas and you are praised by the three Vedas. You are the form of Yagya, appear in Yagya and are the master of Yagya. I salute you again and again.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥