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mahabharat 14.110.d28: हे राजन! जो मनुष्य केवल द्वादशी तिथि को ही व्रत करता है, उसे उपरोक्त फल का आधा ही प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 14.110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.110.d28 
केवलेनोपवासेन द्वादश्यां पाण्डुनन्दन।
यत् फलं पूर्वमुद्दिष्टं तस्यार्धं लभते नृप॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जो मनुष्य केवल द्वादशी तिथि को ही व्रत करता है, उसे उपरोक्त फल का आधा ही प्राप्त होता है।
 
O king! One who only fasts on the Dwadashi day receives only half of the aforesaid reward.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)