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mahabharat 14.110.d26: महाराज! जो अश्विनी द्वादशी को व्रत करता है और पद्मनाभ नाम से मेरी पूजा करता है, उसे एक हजार गौओं के दान का फल मिलता है।   |   mahabharat अध्याय 14.110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.110.d26 
द्वादश्यामाश्वयुङ्मासे पद्मनाभमुपोष्य माम्।
अर्चयेद् य: समाप्नोति गोसहस्रफलं नृप॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जो अश्विनी द्वादशी को व्रत करता है और पद्मनाभ नाम से मेरी पूजा करता है, उसे एक हजार गौओं के दान का फल मिलता है।
 
Maharaj! One who fasts on the Dwadashi of Ashwini and worships me in the name of 'Padmanabha' gets the reward of donating one thousand cows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)