vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान्की स्तुति
»
श्लोक d25
श्लोक
14.110.d25
मासे भाद्रपदे यो मां हृषीकेशाख्यमर्चयेत्।
उपोष्य स समाप्नोति सौत्रामणिफलं नृप॥
अनुवाद
नरेश्वर! जो मनुष्य भाद्रपद मास की द्वादशी तिथि को व्रत रखता है और 'हृषीकेश' नाम से मेरी पूजा करता है, उसे सौत्रामणि यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
Nareshwar! One who fasts on the twelfth day of Bhadrapada month and worships me in the name of 'Hrishikesh', gets the results of Sautramani Yagya.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas