vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान्की स्तुति
»
श्लोक d17
श्लोक
14.110.d17
द्वादश्यां पुष्यमासे तु नाम्ना नारायणं तु माम्।
उपोष्य पूजयेद् यो मां वाजिमेधफलं लभेत्॥
अनुवाद
जो पौष मास की द्वादशी को व्रत रखता है और 'नारायण' नाम से मेरी पूजा करता है, उसे वाजिमेध यज्ञ का फल मिलता है।
He who fasts on the Dwadashi of the month of Paush and worships me in the name of 'Narayana' gets the fruit of the Vajimedha Yagya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×