vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान्की स्तुति
»
श्लोक d15
श्लोक
14.110.d15
द्वादश्यामेव वा कुर्यादुपवासमशक्नुवन्।
तेनाहं परमां प्रीतिं यास्यामि नरपुङ्गव॥
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! जो मनुष्य सब समय उपवास न कर सके, उसे केवल द्वादशी तिथि का ही उपवास करना चाहिए; इससे मुझे बहुत प्रसन्नता होती है।
Narashrestha! One who cannot fast on all occasions, should fast only on the twelfth day; This makes me very happy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×