श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  14.110.d11 
श्रीभगवानुवाच
शृणु राजन् मया पूर्वं यथा गीतं तु नारदे।
तथा ते कथयिष्यामि मद्भक्ताय युधिष्ठिर॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले- महाराज युधिष्ठिर! आप मेरे भक्त हैं। जैसा मैंने पहले नारद जी से कहा था, वही बात मैं आपसे कह रहा हूँ, सुनिए।
 
Sri Bhagavan said- Maharaj Yudhishthira! You are my devotee. Just as I had told Narada earlier, I am telling you the same thing, listen.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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