श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  14.110.d1 
युधिष्ठिर उवाच
सर्वभूतपते श्रीमन् सर्वभूतनमस्कृत।
सर्वभूतहितं धर्मं सर्वज्ञ कथयस्व न:॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - हे प्रभु! आप समस्त प्राणियों के स्वामी, सबके द्वारा पूजित, सुन्दर और सर्वज्ञ हैं। अब कृपा करके मुझे समस्त प्राणियों के लिए हितकारी धर्म का वर्णन कीजिए।
 
Yudhishthir said – Lord! You are the master of all living beings, worshiped by all, beautiful and omniscient. Now please describe to me the religion beneficial for all living beings.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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