Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.109.d5: तत्पश्चात स्नान करके शुद्ध होकर श्वेत वस्त्र धारण करें, कमर में मुंज की पेटी बांधें तथा एक हाथ में पलाश का दंड धारण करें तथा ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें।   |   mahabharat अध्याय 14.109: चान्द्रायण-व्रतकी विधि, प्रायश्चित्तरूपमें उसके करनेका विधान तथा महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 109: चान्द्रायण-व्रतकी विधि, प्रायश्चित्तरूपमें उसके करनेका विधान तथा महिमाका वर्णन  »  श्लोक d5
 
 
श्लोक  14.109.d5 
शुक्लवासा: शुचिर्भूत्वा मौञ्जीं बध्नीत मेखलाम्।
पालाशदण्डमादाय ब्रह्मचारिव्रते स्थित:॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात स्नान करके शुद्ध होकर श्वेत वस्त्र धारण करें, कमर में मुंज की पेटी बांधें तथा एक हाथ में पलाश का दंड धारण करें तथा ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें।
 
Thereafter, after taking a bath and purifying oneself, wear white clothes, tie a belt made of Munj around the waist and hold a staff made of Palash in one hand and observe the vow of celibacy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)