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mahabharat 14.107.d51: जो विद्यार्थी न तो धर्म से लाभ उठाता है, न धन से, तथा जो ज्ञान प्राप्ति के लिए आवश्यक कर्तव्यों का पालन नहीं करता, उसे अध्ययन नहीं करना चाहिए, जैसे बंजर खेत में अच्छे बीज नहीं बोए जा सकते।   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.107.d51 
धर्मार्थौ यदि न स्यातां शुश्रूषा वापि तद्विधा।
विद्या तस्मिन् न वक्तव्या शुभं बीजमिवोषरे॥
 
 
अनुवाद
जो विद्यार्थी न तो धर्म से लाभ उठाता है, न धन से, तथा जो ज्ञान प्राप्ति के लिए आवश्यक कर्तव्यों का पालन नहीं करता, उसे अध्ययन नहीं करना चाहिए, जैसे बंजर खेत में अच्छे बीज नहीं बोए जा सकते।
 
A student who neither benefits from religion nor wealth and who does not perform the duties conducive to the acquisition of knowledge should not study, just like good seeds cannot be sown in a barren field.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)