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mahabharat 14.107.d35: गाय, वस्त्र, शय्या और स्त्री को कभी भी बहुत से लोगों को नहीं देना चाहिए; क्योंकि ऐसा करने से दानकर्ता को दान का फल नहीं मिलता।   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.107.d35 
बहूनां न प्रदातव्या गौर्वस्त्रं शयनं स्त्रिय:।
तादृग्भूतं तु तद् दानं दातारं नोपतिष्ठति॥
 
 
अनुवाद
गाय, वस्त्र, शय्या और स्त्री को कभी भी बहुत से लोगों को नहीं देना चाहिए; क्योंकि ऐसा करने से दानकर्ता को दान का फल नहीं मिलता।
 
A cow, a cloth, a bed and a woman should never be given into the possession of many people; because if one does so, the donor does not get the fruits of the donation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)