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mahabharat 14.107.d12: राजन! अब निन्दनीय ब्राह्मणों का वर्णन सुनो। संसार में छल-कपट करने वाले ब्राह्मण वेदों को अच्छी तरह जानने पर भी पापी माने जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.107.d12 
निन्द्यान् शृणु द्विजान् राजन्नपि वा वेदपारगान्॥
ब्राह्मणच्छद्मना लोके चरत: पापकारिण:।
 
 
अनुवाद
राजन! अब निन्दनीय ब्राह्मणों का वर्णन सुनो। संसार में छल-कपट करने वाले ब्राह्मण वेदों को अच्छी तरह जानने पर भी पापी माने जाते हैं।
 
King! Now listen to the description of the Brahmins who are worthy of condemnation. The Brahmins who behave deceitfully in the world are considered to be sinners even if they are well versed in the Vedas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)