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mahabharat 14.106.d4: इसके बाद अपने पैर धो लें और उसी स्थान पर बिछे स्वच्छ आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं और दोनों पैरों से या एक पैर से जमीन को स्पर्श करें।   |   mahabharat अध्याय 14.106: भोजनकी विधि, गौओंको घास डालनेका विधान और तिलका माहात्म्य तथा ब्राह्मणके लिये तिल और गन्ना पेरनेका निषेध   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 106: भोजनकी विधि, गौओंको घास डालनेका विधान और तिलका माहात्म्य तथा ब्राह्मणके लिये तिल और गन्ना पेरनेका निषेध  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  14.106.d4 
आर्द्रपादस्तु भुञ्जीयात् प्राङ्मुखश्चासने शुचौ।
पादाभ्यां धरणीं स्पृष्ट्वा पादेनैकेन वा पुन:॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद अपने पैर धो लें और उसी स्थान पर बिछे स्वच्छ आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं और दोनों पैरों से या एक पैर से जमीन को स्पर्श करें।
 
Thereafter wash your feet and sit on a clean mat spread in the same area, facing east, and touch the ground with either both feet or one foot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)