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mahabharat 14.106.d29: उस मनुष्य द्वारा जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे कभी बुरे स्वप्न नहीं आते।   |   mahabharat अध्याय 14.106: भोजनकी विधि, गौओंको घास डालनेका विधान और तिलका माहात्म्य तथा ब्राह्मणके लिये तिल और गन्ना पेरनेका निषेध   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.106.d29 
यत् कृतं दुष्कृतं तेन ज्ञानतोऽज्ञानतोऽपि वा।
तस्य नश्यति तत् सर्वं दु:स्वप्नं च विनश्यति॥
 
 
अनुवाद
उस मनुष्य द्वारा जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे कभी बुरे स्वप्न नहीं आते।
 
All the sins committed by that man knowingly or unknowingly are destroyed and he never sees bad dreams.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)