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mahabharat 14.106.d27: गौमाता के सामने घास रखकर यह कहना चाहिए - 'संसार की सभी गायें मेरी माताएँ हैं और सभी बैल मेरे पिता हैं। गौमाता! मैंने यह मुट्ठी भर घास आपकी सेवा में अर्पित की है, कृपया इसे स्वीकार करें।'   |   mahabharat अध्याय 14.106: भोजनकी विधि, गौओंको घास डालनेका विधान और तिलका माहात्म्य तथा ब्राह्मणके लिये तिल और गन्ना पेरनेका निषेध   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.106.d27 
गावो मे मातर: सर्वा: पितरश्चैव गोवृषा:।
ग्रासमुष्टिं मया दत्तं प्रतिगृह्णीत मातर:॥
 
 
अनुवाद
गौमाता के सामने घास रखकर यह कहना चाहिए - 'संसार की सभी गायें मेरी माताएँ हैं और सभी बैल मेरे पिता हैं। गौमाता! मैंने यह मुट्ठी भर घास आपकी सेवा में अर्पित की है, कृपया इसे स्वीकार करें।'
 
Keeping grass in front of mother cow, one should say this - 'All the cows in the world are my mothers and all the bulls are my fathers. Mother cows! I have offered this handful of grass in your service, please accept it'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)