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mahabharat 14.106.d22: यदि भोजन करने वाला ब्राह्मण बिना कुल्ला किए अपने भोजन-स्थान से उठ जाए, तो उसे तुरन्त स्नान करना चाहिए, अन्यथा वह अशुद्ध रहता है।   |   mahabharat अध्याय 14.106: भोजनकी विधि, गौओंको घास डालनेका विधान और तिलका माहात्म्य तथा ब्राह्मणके लिये तिल और गन्ना पेरनेका निषेध   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.106.d22 
यद्युत्तिष्ठत्यनाचान्तो भुक्तवानासनात् तत:।
स्नानं सद्य: प्रकुर्वीत सोऽन्यथाप्रयतो भवेत्॥
 
 
अनुवाद
यदि भोजन करने वाला ब्राह्मण बिना कुल्ला किए अपने भोजन-स्थान से उठ जाए, तो उसे तुरन्त स्नान करना चाहिए, अन्यथा वह अशुद्ध रहता है।
 
If a Brahmin who has eaten gets up from his dining seat without rinsing his mouth, he must immediately bathe, otherwise he remains impure.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)