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mahabharat 14.104.d24: जो घर देता है, वह सुन्दर घर पाता है और जो चाँदी दान करता है, वह सुन्दर रूपवान होता है। जो वस्त्र दान करता है, वह चन्द्रलोक में जाता है और जो घोड़ा दान करता है, वह अश्विनी कुमारों के लोक में जाता है।   |   mahabharat अध्याय 14.104: ब्रह्महत्याके समान पापका, अन्नदानकी प्रशंसाका, जिनका अन्न वर्जनीय है उन पापियोंका, दानके फलका और धर्मकी प्रशंसाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.104.d24 
गृहदोऽग्रॺाणि वेश्मानि रूप्यदो रूपमुत्तमम्।
वासोदश्चन्द्रसालोक्यमश्विसालोक्यमश्वद:॥
 
 
अनुवाद
जो घर देता है, वह सुन्दर घर पाता है और जो चाँदी दान करता है, वह सुन्दर रूपवान होता है। जो वस्त्र दान करता है, वह चन्द्रलोक में जाता है और जो घोड़ा दान करता है, वह अश्विनी कुमारों के लोक में जाता है।
 
The one who gives a house gets a beautiful house and the one who donates silver gets a beautiful beauty. The one who gives clothes goes to the world of the moon and the one who donates a horse goes to the world of the Ashwini Kumars.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)