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mahabharat 14.104.d22: पाण्डु नंदन! अब मैं तुम्हें दान का सच्चा फल बताता हूँ, सुनो। जल दान करने वाले को तृप्ति मिलती है और अन्न दान करने वाले को शाश्वत सुख मिलता है।   |   mahabharat अध्याय 14.104: ब्रह्महत्याके समान पापका, अन्नदानकी प्रशंसाका, जिनका अन्न वर्जनीय है उन पापियोंका, दानके फलका और धर्मकी प्रशंसाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.104.d22 
दानानां च फलं यद् वै शृणु पाण्डव तत्त्वत:।
जलदस्तृप्तिमाप्नोति सुखमक्षय्यमन्नद:॥
 
 
अनुवाद
पाण्डु नंदन! अब मैं तुम्हें दान का सच्चा फल बताता हूँ, सुनो। जल दान करने वाले को तृप्ति मिलती है और अन्न दान करने वाले को शाश्वत सुख मिलता है।
 
Pandu Nandan! Now I am telling you the true result of donations, listen. The one who donates water gets satisfaction and the one who gives food gets eternal happiness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)