Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.104.d2: श्री भगवान बोले - राजन! जो जीविका से वंचित ब्राह्मण को स्वयं भिक्षा के लिए बुलाता है और फिर भिक्षा देने से इनकार कर देता है, वह ब्रह्महत्यारा (ब्राह्मण का हत्यारा) कहलाता है।   |   mahabharat अध्याय 14.104: ब्रह्महत्याके समान पापका, अन्नदानकी प्रशंसाका, जिनका अन्न वर्जनीय है उन पापियोंका, दानके फलका और धर्मकी प्रशंसाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 104: ब्रह्महत्याके समान पापका, अन्नदानकी प्रशंसाका, जिनका अन्न वर्जनीय है उन पापियोंका, दानके फलका और धर्मकी प्रशंसाका वर्णन  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  14.104.d2 
श्रीभगवानुवाच
ब्राह्मणं स्वयमाहूय भिक्षार्थं वृत्तिकर्शितम्।
ब्रूयान्नास्तीति य: पश्चात् तमाहुर्ब्रह्मघातकम्॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले - राजन! जो जीविका से वंचित ब्राह्मण को स्वयं भिक्षा के लिए बुलाता है और फिर भिक्षा देने से इनकार कर देता है, वह ब्रह्महत्यारा (ब्राह्मण का हत्यारा) कहलाता है।
 
Sri Bhagavan said - King! He who himself calls a Brahmin who is bereft of livelihood for alms and then refuses to give it is called a Brahmahatyaara (killer of a Brahman).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)