Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.104.d15-d18: इसी प्रकार चुगलखोर, यज्ञफल बेचने वाला, अभिनेता, जुलाहा, कृतघ्न, अम्बष्ठ, निषाद, नाट्य-साधक, स्वर्णकार, वीणा बजाने वाला, शस्त्र बेचने वाला, सूत और मदिरा बेचने वाला, वैद्य, धोबी, स्त्री के वश में रहने वाला, क्रूर व्यक्ति और भैंस चराने वाले का भोजन भी अस्वच्छ माना गया है। जिसकी मृत्यु हुए दस दिन भी न हुए हों, उसका या वेश्या का भोजन भी नहीं करना चाहिए। | mahabharat अध्याय 14.104: ब्रह्महत्याके समान पापका, अन्नदानकी प्रशंसाका, जिनका अन्न वर्जनीय है उन पापियोंका, दानके फलका और धर्मकी प्रशंसाका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथा च पिशुनस्यान्नं यज्ञविक्रयिणस्तथा॥
शैलूषं तन्तुवायान्नं कृतघ्नस्यान्नमेव च।
अम्बष्ठकनिषादानां रङ्गावतरकस्य च॥
सुवर्णकर्तुर्वैणस्य शस्त्रविक्रयिणस्तथा।
सूतानां शौण्डिकानां च वैद्यस्य रजकस्य च॥
स्त्रीजितस्य नृशंसस्य तथा माहिषिकस्य च।
अनिर्दशानां प्रेतानां गणिकानां तथैव च॥
अनुवाद
इसी प्रकार चुगलखोर, यज्ञफल बेचने वाला, अभिनेता, जुलाहा, कृतघ्न, अम्बष्ठ, निषाद, नाट्य-साधक, स्वर्णकार, वीणा बजाने वाला, शस्त्र बेचने वाला, सूत और मदिरा बेचने वाला, वैद्य, धोबी, स्त्री के वश में रहने वाला, क्रूर व्यक्ति और भैंस चराने वाले का भोजन भी अस्वच्छ माना गया है। जिसकी मृत्यु हुए दस दिन भी न हुए हों, उसका या वेश्या का भोजन भी नहीं करना चाहिए।
Similarly, the food of a gossip-monger, a seller of the fruits of sacrifices, an actor, a weaver and the food of an ungrateful person, an Ambhastha, a Nishad, a theatre-goer, a goldsmith, a person who earns his living by playing the Veena, a weapon-seller, a seller of yarn and liquor, a doctor, a washerman, a person who is under the control of a woman, a cruel person and a buffalo-herder is also considered unacceptable. Food of those who have not spent ten days since death or of prostitutes should not be eaten.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥