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mahabharat 14.104.d11: श्री भगवान बोले - राजन! ब्रह्मा सहित सभी देवता अन्न की प्रशंसा करते हैं, अतः अन्न के समान न तो कभी कोई दान हुआ है और न कभी होगा।   |   mahabharat अध्याय 14.104: ब्रह्महत्याके समान पापका, अन्नदानकी प्रशंसाका, जिनका अन्न वर्जनीय है उन पापियोंका, दानके फलका और धर्मकी प्रशंसाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.104.d11 
श्रीभगवानुवाच
अन्नमेव प्रशंसन्ति देवा ब्रह्मपुरस्सरा:।
अन्नेन सदृशं दानं न भूतं न भविष्यति॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले - राजन! ब्रह्मा सहित सभी देवता अन्न की प्रशंसा करते हैं, अतः अन्न के समान न तो कभी कोई दान हुआ है और न कभी होगा।
 
Sri Bhagavan said - King! All the gods including Brahma praise food, hence there has never been any donation like food nor will there ever be.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)